Best New Hindi Poems by Yashu Jaan 2019 2

Best New Hindi Poems by Yashu Jaan 2019

Hello Readers, here is the latest collection of New Hindi poems 2019 by Mr. Yashu Jaan

1. एक बीमारी


एक बीमारी थी मुझे तेरी तस्वीर देख मुस्कुराने की,
अब एक और लग गई है तेरे बिन नींद ना आने की

ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूँ तेरे धोख़े याद करकर,
होश दिल-दिमाग़ ने भुला दी है पीने-खाने की

कि हर बार रहा हूँ ज़िंदा मौत के करीब रह कर,
पर कोशिश तो बड़ी की थी मैंने मर जाने की

और मैं क्यों रहूँ परेशान जुदाई तेरी यूं सहकर,
अब मैं भी चलूँगा चाल तुझपे सितम ढाने की

तेरी याद धोख़े के सिवा है मेरी ज़िंदगी में क्या,
कोई परवाह ही नहीं है यशु अब जान जाने की

2. तेरे ग़म चले आये


ये क्या हुआ जो मेरे रास्ते में तेरे ग़म चले आये,
मुश्किल में तो तुम थे और खींचे हम चले आये

लाख़ कोशिशें की रोकने की अपने आपको मगर,
कुछ ना हुआ बस तेरी ओर मेरे कदम चले आये

सोचता हूँ कि प्यार था अगर तो दूर क्यों हुए थे,
जो बरसों पुरानी दी हुई तोड़ हम कसम चले आये

और तेरे लफ़्ज़ों ने लगाईं थी मेरे ऊपर जो बंदिशें,
उन बंदिशों के फांसलों को करके ख़तम चले आये

अब दूर मत करना ये सोचकर यशु जान को खुद से,
कि दिन-रात दिए जो तूने सहकर सितम चले आये

3. ग़ुनाह


मुझे कई बार लगता है कि मैं गुनाह कर रहा हूँ,
जो अपनी ही ग़ज़ल को पढ़के वाह-वाह कर रहा हूँ

मांगता हूँ वही जो मुकद्दर में है नहीं मेरे फिर भी,
मैं जानबूझकर क्यों उसीकी चाह कर रहा हूँ

और जला दिया है मैंने अपने सारे रिश्तों को तभी,
अब मैं देखकर भी मौत को ना आह कर रहा हूँ

ज़िन्दगी जल्लाद जैसी बन गई है लगे इस तरह,
ना किसी के दर्द की ही अब मैं परवाह कर रहा हूँ

कि जिस दिन से रूठे हैं वो यशु जान से शायर,
साथ अपने मैं दो और दिलों को तबाह कर रहा हूँ

4. मुख में राम


ज़िन्दगी का यही लक्ष्य एक काम होना चाहिए,
सुबह उठते ही मुख में श्री राम का नाम होना चाहिए

दोनों हाथों से मेहनत करके खाओ और दान करो,
सभी भाई-बहनों के लिए यही पैग़ाम होना चाहिए

किसी से चीज़ मांगो अगर मजबूरी में याद रखो,
उसे लौटाने के बाद उसका दुगना दाम होना चाहिए

घर सदस्यों से बनता है और मकान ईंट पत्थरों से,
सबका घर होना चाहिए ना कि मकान होना चाहिए

अयोध्या जैसी नगरी बस सकती है यशु जान पर,
दुश्मनो के लिए भी दिल में सम्मान होना चाहिए

5.सरकार

मेरी कविता के ऊपर कोई सरकार नहीं है,
मेरी कविता किसी की मुहताज नहीं है,

और सरकार कब दिखती है,
जब मतदान का समय निकट होता है,
लोगों के पैरों में जा गिरती है,
जब इनके शिकार का समय निकट होता है
मगर सरकार मेरी कविता की हकदार नहीं है

देश का नागरिक है आज़ाद,
क्यों दबा हुआ है इन दरिंदो के नीचे,
अभी भी समय है उठे नींद से,
जो हाथ कभी ना आएंगे इसके,
भागता है ऐसे परिंदों के पीछे,
लोकतंत्र तो लोकतंत्र है दिखावे का यार नहीं है

होकर एक दूसरे के ख़िलाफ़,
हमें बेवकूफ़ बनाना इनका काम है
पर आपस में रिश्तेदार हैं सब,
इनका लोगों को आकर्षित करना कामयाब है,
इन्हें अपनी जेब की चिंता है किसी से प्यार नहीं है

यशु तेरी हर कविता, ग़ज़ल,
क्या बिगाड़ सकती है ऐसे शैतानों का
पर मुझे पता है मेरी कविता,
जिस्म तक साड़ सकती है इन हैवानों का,
जनता का इशारा चाहिए और किसी इंतज़ार नहीं है

6. हुस्न वालों की शिकायत

कोई शिकायत करो इन हुस्न वालों की,
वरना आशिकों के जनाज़े निकलते रहेंगे

इनका मासूम चेहरा देखकर कोई कुछ ना कहेगा ,
पत्थरों को दिल लगेंगे और पिघलते रहेंगे

उम्मीदों पर पानी फिरेगा आशिकों की खुवाहिशें मरेंगी ,
ना चाहकर भी वो चोट खाते रहेंगे इनसे मिलते रहेंगे

ज़ुल्म जितना मर्ज़ी करें यशु जान ये हुस्न वाले ,
आशिकों की कबर पे मुहब्बत के फूल खिलते रहेंगे

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